एक हम है एक आप हो

मोहब्बत के पागल में, एक हम है एक आप हो I
दो दिलों के हलचल में, एक हम है एक आप हो II

ज़मीन-ए-मोहब्बत में कई इश्क के गुल खिले है I
पर सबसे उम्दा फसल में, एक हम है एक आप हो II

यादों के दरख़्त में मुस्कान पत्ते, गुल हँसी के I
ओर इसके जंगल में, एक हम है एक आप हो II

एक लम्हा तेरी ख़ुशी का, एक लम्हा मेरी ख़ुशी का I
फिर दो लम्हों के पल में, एक हम है एक आप हो II

एक वो जो शमा बनाएं, एक वो जो घटा बर्शाए I
इस दो रंगे बादल में, एक हम है एक आप हो II

अगर इश्क को मिटटी मानो,चाहत को मानो पानी I
तो इस सने दलदल में, एक हम है एक आप हो II

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