ऐ अजनबी..

राहों में आ ऐसे…
जैसे कहीं ना मिले
बाहों में आ ऐसे…
जैसे कहीं दिल मिले
ऐ अजनबी…ऐ अजनबी…

तुम्हें पाके भी.. ऐसा
एहसास न हुआ
तुम्हें देखूं तो … ऐसा
खयाल ना हुआ है
जैसे कोई सपना अपना हुआ
ए अजनबी… ए अजनबी….

ढूंढूं तुम्हें… यूं कहीं
साथी है अब ये जमीन
ये दर्मिंयां.. ये फासले…
जीने ना दे अब मुझे
दिल में और तू
तू ही है दिल का मकान
ए अजनबी ….ए अजनबी…

मेरी सारी शोहरत है तेरी
निगाहें तेरी जो ये मस्ती भरी
ऐसे में तू और मैं..
मिल जाए सुकून
ए अजनबी… ए अजनबी

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