बाजरे की रुखाल

******बाजरे की रुखाल******
तेरे बाजरे की मैं ना बैठूं रुखाल हो पिया जी
घर आंगण के काम भतेरे आजकाल हो पिया जी 2

ऊपर तै गर्मी का महीना तरसूं ठंडे पाणी नै
खेतां बीच तू मत ना रुलावै तेरे आंगण की राणी नै
लाडाँ गेल्याँ मा नै पाली काम कै हाथ ना लाण दिया
बाबू का सिर ऊपर राख्या ना कदे उल्लाहणा आण दिया
कह कै ल्याया था राखैगा मनै परियां की ढाल हो पिया जी
तेरे बाजरे की मैं ना बैठूं रुखाल हो पिया जी
घर आंगण के काम भतेरे आजकाल हो पिया जी 2

तड़कै उठ जूं बखत रजा के दीवा बात्ती कर दूं सूँ
बूढ़े दादा का भी उठ कै होक्का ताज़ा कर दूं सूँ
कर कै न्यार अर पाणी सबेरे चुलक लूँ डोक्का भैंस का
दूध बिलौ लूँ दिन तै पहलां टैम बचै कित ऐश का
ताज़ा पाणी ल्याऊं लिकड़ जया चाल हो पिया जी 2
तेरे बाजरे की मैं ना बैठूं रुखाल हो पिया जी
घर आंगण के काम भतेरे आजकाल हो पिया जी 2

जब यू सूरज मुखड़ा दिखावै आधा दिन मेरा जा ले सै
इतने मैं बाबू भी घेर तै उठ कै घर नै आ ले सै
ताता पाणी घाल कै धर दूँ मैं बाबू के नहावण नै
करणे पड़ै त्यार यें बालक फेर स्कूल जावण नै
मां भी होज्या दुखी देख मेरा हाल हो पिया जी
तेरे बाजरे की मैं ना बैठूं रुखाल हो पिया जी 2
घर आंगण के काम भतेरे आजकाल हो पिया जी 2

सारा दिन एक बलध की ढालां घाम मैं तपूँ सूँ मैं
खेत मैं भी ठा कसौला तेरे जितणा काम करूं सूँ मैं
सांझा नै फेर पाँ बोचूँ सूँ मेरी सासु राणी के
दो तीन गैडे हो जांवै सै पीण आले पाणी के
के भूजै गा दीप सुनाऊं सारे सारा तनै हाल हो पिया जी
तेरे बाजरे की मैं ना बैठूं रुखाल हो पिया जी
घर आंगण के काम भतेरे आजकाल हो पिया जी 2

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