Ali aur Jin Ka School

शैली (Genre): – काल्पनिक कथा (Fantasy Fiction)

प्रेमिस (Premise): – इल्म हासिल करने के लिए दुनिया के किसी भी कोने में जाना पड़े इंसान को जाना चाहिए. फिर चाहे स्कूल जिन का हो या इंसानों का.

थीम (Them): जो आज-तक नहीं हुवा वह अब हो रहा हैं. इंसान दुनिया में सब से बहेतर हैं और दुनिया पर राज कर करते हैं चाहे वह परजा का राजा हो या जिनों को अपने काबु में करना हो.

यह कहानी हैं खेतों में रोज से काम करने वाले एक गरीब इंसान के बेटे की. जिसका नाम अली था और अली के पिता का ताहेर था. ताहेर को एक भी बहन भाई नहीं थे. ताहेर की शादी हो कर दस साल बितगाए थे लेकिन ताहेर को एक भी अवोलाद नहीं थी इस वजह से ताहेर बहोत दु:खी रहेने लगा.

ताहेर को पूरी रात जाग कर खेत में पानी देना पड़ता था. ताहेर का खेत गंगा के करीब ही था. ताहेर हर रोज़ की तरह अपने खेत में पानी दे रहा था. रात के तकरीबन तीन बज रहे थे तभी ताहेर को गंगा की तरफ से आती कुछ आवाज़े सुनाई दी. ताहेर ने गंगा की तरफ जा कर देखा तब उसे बहोत सी परियों का झुंड जाता नज़र आया. ताहेर ने छुपकर एक परी को उसके सर के बालों को फ़ौरन पकड़ लिया. उस परी ने छुटने की बहोत कोशिश की नाकाम हो गई और दुसरे सारे परीयां इस लिए कुछ नहीं कर रहे थे क्युंकी उनकी साथी ताहेर की गिरफत में थी.

ताहेर ने परी से कहा मै तुम्हे झोड़ दूंगा तुम्हे मेरी एक दुवा खुदा के पास से पूरी करवानी होगी. परी ताहेर की बात मान गई.

ताहेर:- मुझे एक बेटा चाहिए मेरी यंही दुवा हैं. जब मुझे एक बेटा होगा तब उसकी पढाई तुम्हारे बच्चों के साथ दुम्हारे स्कूल में होगी और उसकी हिफाजत तुम्हे करनी होगी मरते दम-तक.

परी:- तुम्हारी यह दुवा ज़रूर पूरी होगी लेकिन तुम्हे अपनी दुवा के बदले अपनी जान की क़ुरबानी देने होगी.

ताहेर:- जो चाहे वह मुझसे जुरमाना लेलो मै तयार हूँ.

परीयां चली गई और ताहेर अपने घर आ गया. रात बहोत थी इस लिए ताहेर किसी से बात किए बिना ही चुप-चाप अपने बिस्तर पर सो गया. सुबह हो गई ताहेर के घर वाले ताहेर को नीद से जगा राहे थे लेकिन ताहेर का इन्तेकाल हो गया था. कुछ घंटों बाद ताहेर का कफन-दफन हो गया. ताहेर के जाने की वजह से ताहेर की बीवी की तबियत रात को ख़राब हो गई जिसकी वजह से ताहेर की बीवी को हॉस्पिटल ले जाना पड़ा. डॉक्टर ने बताया के ताहेर की बीवी माँ बन्नेवाली हैं. कुछ दिन गुज़र ने के बाद एक रात ताहेर अपनी बीवी और माँ के खाब में आकर पूरी बात बताई.

कुछ महीने गुज़र ने के बाद ताहेर के बच्चे का जन्म हुवा. ताहेर की बीवी भी इस दुनिया को छोड़ चली गई ताहेर के बच्चे की पूरी ज़िम्मेदारी अब ताहेर की माँ पर आ गई. ताहेर की माँ ने ताहेर के बच्चे का नाम अली रखा. ताहेर की माँ ने बहोत परेशानी का सामना करते हुवे अली को पाला और आज अली को पुरे पांच साल पुरे हो गए थे. आज रात को ही ताहेर की माँ को परी ने खाब में आकर कहा. अली का कलसे स्कूल शुरूं होगा. अली को कब और कहां लाना हैं यह सारी बातें परी ने ताहेर की माँ को बतलाई.

ताहेर की माँ ठिक उस वक़्त और उस जगा पर अली को ले गई. कुछ देर बाद दो-तीन परीयां और परीयों के बच्चें और जिन के बच्चों का एक झुंड अली के करीब आया और उन्हुने अली को अपने साथ उनके स्कूल ले चले गए. अली को जिस स्कूल में ले गए थे उस स्कूल में जिन और परी के बच्चे अपनी तालीम हासिल करते थे. उस स्कूल में पहली पर इंसान का बच्चा तालीम लेने आया था.

अली को परीयों के बच्चे चाहने लगे हर-पल मदत करते लेकिन जिन के बच्चे हमेशा अली को परेशान करते. एक जिन ऐसा भी था जो इंसान की जात से बहोत नफ़रत करता था. वह जिन ही अली को मारदेना चाहता था. परी हमेशा अली की हिफाजत करती थी.

अगली कहानी में हम यह बताएंगे के अली अपने डर को कबो करके तालीम कैसे हासिल करता हैं. जिन के बच्चे कितना, और कैसे अली को परेशान करते हैं अली उन परेशानियों को किस तरह पार करता हैं. जिन और परी के खेल खेलता हैं और उनकी पढाई में उनके ही बच्चों को पीछे छोड़ता हैं.

—The End—

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