Aurat Ka Dhokha

Created by :- Mohammad Irfan

ज़ालिम ये क्या किया हमें बर्बाद कर दिया |
अरमानो के महल को ताराज कर दिया ||

तेरा न बिगड़ा कुछ भी, वाहों में उसकी जाकर
रोते हें हम हमारे , उजड़े हुए जहां पर
तूने जिगर को छेद के पार कर दिया |
अरमानों के महल को तराज़ कर दिया ||

तेरे हंसी लवों की जुम्बिश न काश होती
न होते काश तीरी तिरछी नज़र के साए
तूने जहां में प्यार को बदनाम कर दिया |
अरमानों के महल को ताराज कर दिया ||

ज़ख्मों के साए में हम जी लेंगे ज़िंदगी को
चाहत के दरमियाँ न लायेंगे अब किसी को
हमनें तो अपने दर्द को दिल में छुपा लिया |
अरमानों के महल को ताराज कर दिया ||

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