जोगी के संग जाणा (हरयाणवी)

इश्क की धुन मैं जोग ले लिया छूट गया पीणा खाणा
गात पै राख रमा ली मन्नै ले लिया भगमा बाणा

बोल प्रेम के मीठे लागे निखरया रूप निमाणा
भूल गई मैं दुनिया दारी जोगी के संग जाणा
ओ मनै जोगी के संग जाणा

मीठी बोली मनै मार गी दिल नै मेरे चीर गया
एक परदेसी रांझा बण कै मनै बणा कै हीर गया
आण कुएं पै बैरी मेरे घडवे का पी नीर गया
बैठी राह इब देखूं उसकी कड़ै वो मेरा फ़कीर गया
सुपने लाख दिखा कै वो मनै कर खुद तै बिराणा
भूल गई मैं दुनिया दारी जोगी के संग जाणा
ओ मनै जोगी के संग जाणा

कागज सी मै कोरी थी मेरी मति मार गया बैरी
उसकी बातां मैं डूब गई कति बात बता गया गहरी
मेरे हिस्से के दुख वो लेग्या कील कै शिखर दुफैरी
होवै मेरी सुणवाई जब बेठैगी इश्क़ कचहरी
जोगी के संग बूण बैठी मैं जीवन आला ताणा
भूल गई मैं दुनिया दारी जोगी के संग जाणा
ओ मनै जोगी के संग जाणा

के होणा मेरा जाणू ना मैं प्रेम की लत इब ला बैठी
मीठा समझ जहर का लाड़ू बण भोली खा बैठी
जख्मी था दिल मेरा मैं जोगी तै दवा करा बैठी
दुखां तै भीतर भर रया था सारे राज़ बता बैठी
सुण गया कै दुखड़ा मेरा वो ऐ तहसील ओर थाणा
भूल गई मैं दुनिया दारी जोगी के संग जाणा
ओ मनै जोगी के संग जाणा

खुशियां तै मेरा दिल भर गया मनै भगमे के संग जोग लिया
बण कै हंस उनै मेरे आँसुआ मैं तै मोती चोग लिया
नाचूँ सूँ मैं हो कै बावली जब तै यू कड़वा रोग लिया
करूँ शुकराना उस मालिक का जिसनै मान संजोग लिया
मनै जोगी रूप मै वर पागया भगवान का शुक्र मनाणा
भूल गई मैं दुनिया दारी जोगी के संग जाणा
ओ मनै जोगी के संग जाणा

राह तो तेरी भी इसीऐ सै तू कलम तै रस्ता काट रहया
ग्यान पै शीश झुकै सै तू लिख लिख कै जगत मैं बांट रहया
शब्दां का फर्क तनै बुरा लगै तू खरे लेख नै छांट रहया
दोहरे अर्थ के लिखणिये नै आगै आकै डाँट रहया
कुछ समझ मैं आज्या तो सुण ल्यो “दीप” सच्चा गाणा
भूल गई मैं दुनिया दारी जोगी के संग जाणा
ओ मनै जोगी के संग जाणा

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