न्याय

कलयुग मैं देखने को मिल रहा है कि जो लोग अपराध करते हैं वो धनवान हैं पावर फुल हैं ऐसे व्यक्तियों को न अदालत से सजा मिलती हे न भगवान से, इस व्यस्था से क्षुब्ध होकर पचास वर्ष का गरीब सेवा सिंह बृह्म महुरत मैं भगवान शंकर को बुरा भला कह रहा है उनका अपमान कर रहा है। ये देखकर देवता लोक मैं बेठे भगवान के सचिव को क्रोध आता है वो यमदूतों से सेवा सिंह की आत्म को लाने को कहते हैं आत्मा आती है सचिव उसे डांटते हैं आत्मा भी सचिव पे गुस्सा करते हुऐ कहती है
_गरीब का भगवान के अलावा कोई नहीं होता अगर भगवान ही नहीं सुनेगें तो कोन सुनेगा जिसने मेरी बेटी का
बलात्कार किया उसका कत्ल किया उसे सजा तो नहीं मिली हां मन्त्री बन गया अगर भगवान अपराधी को तुरन्त सजा दें तो अपराध समाप्त हो जायेगें अब ऐसे मैं नाराज न होऊं तो क्या करूं
सचिव सेवा सिंह से प्रभावित हुऐ ओर दूतों से आत्मा को धरती पे ले जाने को कहा ओर खूद भगवान जी के पास जाकर सुझाव देने लगे कि अपराधियों को तुरन्त सजा देकर उन्हैं एहसास दिलाया जाये कि जो सजा उन्हैं मिली है उनके अपराध के कारण मिली है भगवान ऐसी व्यवस्था
लागू करने को राजी हो जाते हैं
फिर जिन्होने सेवा सिंह को सताया था सबको सजा मिली
ओर मुख्य अपराधी को भीवत्स सजा मिली
सेवा सिंह की आत्मा को शान्ति मिली ओर वो भगवान
का प्रचार करने मैं लग गया

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