प्रेम की अगन

प्रेम जाल की अगन में जला के तुझको भष्म करूँ फट स्वाहा, स्वाहा, स्वाहा | जब साम ढले पीपल तले लेकर तुझको मई मस्त करू , फट स्वाहा, स्वाहा,स्वाहा | जब रत हो नदी तट पर तेरे संग रोमांस करूँ , फट स्वाहा , स्वाहा,स्वाहा | प्रेम जाल के अगन में सी सोर पर लेकर …

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