The Mount Sinai

कहानी का नाम—– दी माउंट सिनाई
लेखक —– के. आलमगीर
मिस्र के पिरामिड मानव सभ्यता की सबसे उल्लेखनीय तकनीकी उपलब्धियों में से एक हैं। ऐतिहासिक पृष्ठ्भूमि की इस कहानी में प्राचीन मिस्र के विशाल मन्दिरों और महान पिरामिडों के निर्माता, महान शासक फैरों और एक महान पैगम्बर मूसा के बीच उस समय घटित घटनाओं का एक सिलसिलेवार वर्णन है।
फैरों अपनी स्वयं की दिव्य शक्तियों, भयानक काले शियारों के मुँह वाली अनुबिस की विशाल सेना और अहमोस की दिव्य शस्त्रों वाली सेना की ताकत के बल पर उस समय इतना ज़्यादा ताक़तवर हो गया था, कि उसने अपने खुद के रब होने का दावा कर दिया। और मिस्र में फरमान जारी कर दिया
“मै ही तुम्हारा सबसे बड़ा रब हूँ” ।
वजीर हामान और मंदिरो के बड़े पुजारी आमून की मदद से फैरो उस “मौत की किताब” को रानी हेट्सेप्सुत के मंदिर से हासिल करने में कामयाब हो जाता है जिसे आइसिस ने अपने पति महान ओसिरिस के मृत शरीर को पुनरस्थापित करने के लिए हजारों वर्ष पहले महान देवता रे से हासिल किया था। जब ओसिरिस के ध्रूत भाई सेत ने एक षड्यंत्र के तहत ओसिरिस को एक सोने के ताबूत में कैद कर उसे बंद करके समुंदर की गहराइयों में डाल दिया था। तब आईसिस और उसकी बहन नेपथिस ने, जो कि सेत की पत्नी थी, अपनी दैवीय शक्तियों से सोने के भारी ताबूत को भूमध्य सागर से बाहर निकाल लिया और ओसिरिस के मृत शरीर को पुनस्र्थापित कर लिया। आइसिस ने ओसिरिस के साथ एक खुफिया स्थान पर मिलन करके एक महानतम पुत्र होरस को जन्म दिया। होरस ने बड़े होकर सेत को युद्ध के मैदान में चुनौती दी। युद्ध के मैदान में एक भयंकर लड़ाई के बाद होरस ऊपरी मिस्र और निचले मिस्र, के दोहरे ताज को धारण करके मिस्र के तख्त पर आसीन हुआ।
बनी इसराईल (याकूब की औलाद) जो पैगम्बर युशुफ के वक्त में मिस्र में आ कर बस गए थे और जब उनके 12 कबीले मिस्र में फलने फूलने लगे और आबादी में बढ़ गए तो उन्होंने फैरो को अपना रब मानने से इन्कार कर दिया तब फैरो ने उन्हें अपनी दिव्य शक्तियों से उनको गुलामी में जकड़ दिया और सामूहिक निर्माण परियोजनाओं में झोक दिया, उनसे पहाड़ो से भारी भारी पत्थर ढुलवाये गए और भारी मशक्कत के काम लिए। निर्माण परियोजनाओं में इस्तेमाल किये जाने के लिए सोने की आपूर्ति के लिए कारून जैसा कीमिया के इल्म का माहिर और अजीबो गरीब इल्म हासिल एक शख्स भी था। कारून ने अपने इस कीमियाई इल्म से मिस्र में सोने के अम्बार लगा रखे थे ।
इसी दौरान जब बनी इसराईल में मूसा का जन्म होता है तो फैरो के डर से मूसा की माँ मूसा को एक लकड़ी के बक्से में दरिया-ए-नील में डाल देती है। वो बक्सा बहता हुआ फैरो के महल से जा लगता है।
फैरो की रानी इसेतनोफ्रेत दरयाए नील में बक्से में एक हसींन जमील बच्चे को पाकर उसे अपने महल में ले आती है और फैरो से कहती है “क्यों नहीं हम इसे अपना बेटा बना ले, अजब नहीं की ये बड़ा होकर हमको फायदा पहुँचाये”।
बड़ा होने पर मूसा को सिनाई पहाड़ पर खुदा से मोजजे मिलते है। और हुक्म होता है
“ मूसा मिस्र में फैरो के पास जाओ और नरमी से नसीहत करो की वो बड़ा सरकस हो रहा है”।
मिस्र में फैरो का वजीर हामान फैरो को मूसा के कत्ल की ही तरकीब देता है। लेकिन मूसा पर उनका कुछ बस नहीं चलता क्योकि मूसा के पास एक असा (लाठी) है जो जमीन पर डालते ही एक खौफनाक अजदाह में तब्दील हो जाता है और उसका कोई मुकाबला नहीं। हामान सलाह देता है की पूरे मुल्के मिस्र से माहिर जादूगरों को बुलवाये, जो भारी जादू से मूसा को हरा दे। जादूगर बड़ा भारी जादू बनाकर लाए कि मख्लूक मारे हैबत के चिल्ला उठी।
तो मूसा ने भी अपना असा (लाठी) डाल दिया तो वो एक बड़े खौफनाक अजदहा में तब्दील हो कर वहां मौजूद तमाम जादू के सामान के साथ साथ महल के ईट पत्थर और वहां मौजूद मख्लूक को भी निगलना शुरू कर देता है और फिर फैरो की ओर झपटता है । ये देख फैरो खौफजदा हो जाता है और चिल्ला उठता है
“ऐ मूसा इस बला को रोको“
ये देख कर भी फैरो कठोर बना रहता है और वो बनी इसराइल पर जुल्म और बढ़ा देता है। तब मूसा एक रात को बनी इसराइल को मुल्के मिस्र से कूच कर जाने का हुक्म दे देता है। फैरो पीछा करता है ।
बनी इसराइल भागते हुए जब दरिया कुलजुम (लाल सागर) पर पहुँचते है तो दरिया को सामने देख कर चिल्ला उठते है “मूसा हम तो घिर गए“।
तब मूसा अपना असा (लाठी) दरिया पर मारता है तो उसमे 12 सूखे रास्ते बन जाते है और मूसा बनी इसराइल को लाल सागर के पार ले जाता है। फैरो अपनी महान अहमोश की दिव्य अस्त्रों से सुसज्जित महान सेना और हामान के साथ मूसा का पीछा करता हुआ दरिया कुल्जुम पर आकर उसमें 12 सूखे रस्ते देखता है तो बड़ी हैरत में पड़ जाता है। हामान के उकसावे में आकर लश्कर समेत इन गैबी रास्तों पर उतर पड़ता है तो बीच रास्ते में ही दरिया का पानी उनपर टूट पड़ता है और फैरो और उसका तमाम लश्कर दरियाए कुल्जुम में गरक होकर रह जाता है। तो हमेशा के लिए घाटा उठाने वालों में हो गया और मानव सभ्यता के लोगों के लिए हमेशा के लिए एक निशानी ठहरा दिया गया।

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