Chorva vivah

“चोरवा विवाह”
ड्रामा
बिहार में दहेज़ से प्रताड़ित हो रहे गरीब लोग मजबूर हैं अपनी बेटियों का चोरवा विवाह करने पर, समाज की कुरीतियाँ और खाप पंचायतों की मनमानी को दर्शाती, और शहर की शादियों और गाँव की शादियों में अंतर भी दिखा दिया जायेगा।

बिहार के किसी गांव में पति पत्नी परेशान है अपनी बेटी शादी कैसे करें?
पिछले कुछ सालों से फसल भी चौपट हो रही है और लड़की के लिए जो भी रिश्ते आ रहे रहे हैं वह लोग मोटी रकम मांग रहे हैं दहेज के रुप में।
पति कहता है कि अब उनके पास कोई दूसरा उपाय नहीं है चोरवा विवाह करने के अलावा।
पत्नी आशंका जाहिर करती है कि पता नहीं कैसा लड़का होगा हमारी बेटी को खुश रख पाएगा या नहीं।
तो पति कहता है कि तुम शांत रहो मैं पहले अच्छे से देख लूंगा। इसके बाद ही तय किया जाएगा कि कौन सा दूल्हा हमारी बेटी के लिए सही रहेगा और वह निकल जाता है दूसरे गांव में लड़का खोजने के लिए एक लड़का मिलता है जो कि उसे सही लगता है उसका पीछा करता है उसका व्यवहार कैसा है पूरा दिन उसका पीछा करने पर उसे पता चलता है कि उसकी आदत सही नहीं है।
इसी तरह से उसे तीन चार लड़के और मिलते हैं जो कि पहले तो देखने में सही लगते हैं पर बाद में उनकी असलियत कुछ और ही होती है।
चौथा लड़का मिलता है वह सरकारी स्कूल में टीचर है और मिडिल क्लास फैमिली से है उसकी आदतें भी सही वह अपनी बेटी के लिए इस लड़के को चुन लेता है।
दूसरी तरफ एक और लड़का है जो कि दिल्ली में रहता है उसका रियल स्टेट का बहुत बड़ा बिजनेस है करोड़ों की कमाई है वह किसी काम से पटना जा रहा होता है उसके पिता उसकी शादी तय पहले से ही कर देते हैं।

बिहार में ऐसे गिरोह मौजूद हैं जो पैसा लेकर लड़के को किडनैप करने से लेकर शादी कराने तक की पूरी जिम्मेदारी लेते हैं लड़की का पिता यह काम उन्हें सौंप देता है। और सारी जानकारी दे देता है कि वह कौन से स्कूल में पढ़ाने जाता है कब घर से निकलता है और कब वापस आता है।
दिल्ली वाला लड़का पटना पहुंच जाता है और मीटिंग में समय होने के कारण वह कुछ देर ऐसे ही टहलने के लिए निकल जाता है जो गिरोह मास्टर को पकड़ने के लिए आता है वह गलती से उस लड़की को उठा ले जाता है जब मैं गांव पहुंचते हैं तो लड़की का पिता देखकर कहता है कि यह वह लड़का नहीं है आप गलत लड़के को उठा लाए।
दिल्ली वाले लड़के के घर वाले परेशान हैं कि आखिर यह चला कहां गया मीटिंग में भी नहीं पहुंचा।
वह पुलिस में उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखा देते हैं गिरोह टीचर को पकड़ने के लिए दोबारा से प्लान बनाता है और एक दिन चुन लेते हैं कि किस दिन उठाने जाना है।
रात को जैसे टीचर के घरों से उठाने के लिए पहुंचते हैं तो वहां देखते हैं कि पहले से ही कोई उसे उठा ले गया है।
Interval
गिरोह वापस आकर पता लगाता है के मास्टर को किसने उठाया तो पता चलता है कि पास वाले गांव में ही किसी ने टीचर को शादी करने के लिए उठाया है।
इधर लड़का गांव से भागने की कोशिश करता है लेकिन डरता भी है। क्योंकि दो बंदूकधारी हमेशा उसके साथ मुस्तैद रहते हैं और पूरा गांव इस चोरवा विवाह में शामिल रहता है सब एक दूसरे का साथ देते हैं और कोई भी पुलिस को खबर नहीं करता।
गिरोह का सरदार उस गांव में पहुंच जाता है और कहता है कि इस टीचर की सुपारी पहले हमने ली थी इसलिए यह हमारा है। हमें दे दो। और वह लड़ने पर उतारू हो जाते हैं लेकिन गांव के बुजुर्ग कहते हैं कि लड़ाई झगड़ा करने से कोई फायदा नहीं है।
हम आपको लड़का दे देंगे।
सरदार जैसे ही वापस आता है उन्हें पता चलता है कि वह गांव वाले उस मास्टर की शादी कर रहे हैं यह लोग बंदूक लेकर जाते हैं और दूल्हे को किडनैप कर लाते हैं।
लेकिन जब आ कर देखते हैं तो पता चलता है यह है असली दूल्हा नहीं है उन्होंने कहीं चुपके से उस मास्टर की शादी कर दी है और यह है गिरोह की आंखों में धूल झोंकने के लिए यह स्वांग रचाया गया था।
इधर दिल्ली वाला लड़का गांव के बुरे हालात देखता है कि वह किस तरह की परेशानियों को झेलते हुए जी रहे हैं।
लेकिन फिर भी गांव वाले मौज मस्ती करते हैं वह देसी शराब पीकर कभी-कभी नाचते गाते भी हैं।
उसकी जिस लड़की से शादी होने वाली है वह इतनी सुंदर नहीं जितनी हो सकती थी। लड़के को उससे आकर्षण तो हो जाता है लेकिन इतना नही कि उससे शादी ले।
अब जब मास्टर की शादी हो चुकी है तो लड़की का पिता उदास और परेशान हो जाता है।
गांव के कुछ लोग सलाह देते हैं कि शहरी लड़के से ही लड़की का गठबंधन करा देते हैं लड़की का पिता मान जाता है और लड़के को बेहोश करके उसके साथ शादी की जा रही है जब उस लड़के को होश आता है तब उसे बंदूकधारी चारों ओर से घेरे हुए हैं और पंडित मन्त्र पढ़ रहा है और उसकी शादी हो रही है।
शादी होने के बाद लड़का और लड़की को एक ही कमरे में बंद कर दिया जाता है अगर सुबह तक लड़की दूल्हे को मना लेती है तो शादी संपन्न मानी जाती है।
पर इस शहरी लड़के के केस में ऐसा नहीं होता लड़की समझदार होती है। वह नहीं चाहती कि इस तरह से इस तरह किसी से जबरदस्ती शादी की जाए और वह सुहागरात मनाने का प्रयत्न ही नहीं करती।
इधर टीचर अपनी पत्नी को अपना लेता है लेकिन उसके मां बाप नहीं मानते जिससे पंचायत लगती हैं।
और पंचायत में फैसला दिया जाता है कि लड़की का पता लड़के वालों को ₹100000 दहेज के रूप में देगा लड़की वाले रोते-बिलखते हैं पर शर्त मंजूर नहीं की जाती आखिर लड़की के पिता को अपनी जमीन 3 साल के लिए गिरवी रखकर वह पैसा चुकाना पड़ता है और जिसके पास वह जमीन गिरवी रखता है वह पंचों का सरदार ही होता है।
दिल्ली वाले लड़के के पिता पुलिस पर दबाव बना रहे हैं कि वह जल्दी से उसके लड़के को ढूंढो।
गांव का एक आदमी गद्दारी कर देता है और पुलिस को इस बात की खबर दे देता है कि लड़का उनके गांव में है पुलिस वहां पहुंचती है इससे पहले लड़का गांव से भागने में कामयाब हो जाता है।
गांव में लड़की रोती रहती है।
गिरोह वाले लड़की के पिता को पैसे वापस कर देते हैं।
लड़का उदार दिल का है उसे गांव के अच्छे लोगों की याद आती है वह किस तरह से मिल जुल कर रहते हैं।
लेकिन फिर भी वह उस लड़की को अपनी पत्नी के रूप में अपनाने को तैयार नहीं होता। यही समाज का असली रूप है।
The end अंत को फ़िल्मी भी किया जा सकता है।

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