EK BETI

 

कहानी के विषय

  • कहानी सत्य घटनाओ पर लिखी गई है देश के अलग अलग राज्यों में हुई

बेटियों के प्रति भेदभाव की सत्य घटनाओ को कहानी में बताया गया है

  • एक गाँव में बेटियों का जन्माक इस्तर न के बराबर हो जाने पर प्रधान मंत्री जी के

द्वारा चलाया गया अभियान बेटी बचाओ बेटी पढाओ को धयान में रखते हुए इस

कहानी को लिखा गया है

  • प्रधान मंत्री जी की मान की बातो से प्रेरित होकर एक बेटी पढने का फेसला करती है

उसके सामने किस किस तरह की मुश्किले आती है वो इस कहानी में बताया गया है

  • बेटा बेटी के भेदभाव की भावना लोगो के मान से निकलने के लिए कहानी में बेटी

परिवार, समाज, और देश के लिए कितनी जरुरी होती है बेटी के प्रति लोग जगरूप

केसे होते है इस बात को भी कहानी में बताया गया है

  • बेटे के साथ साथ बेटी की शिक्षा भी उतनी ही जरुरी होती है जिससे की समाज के

किसी भी वर्ग के लोगो के विकास को आगे बढ़ाने में काम आती है वो सच्चाई इस

कहानी में बताई गई है

1                             एक बेटी

कहानी में जिसका जो भी किरदार है उसको किरदार के नाम से ही बताया गया है

किसी भी किरदार का नाम नहीं रखा गया है

 

व्याख्या = एक गाँव में लड़कियों को शिक्षा ही नहीं जन्म भी नहीं लेने दिया जाता है लड़को  

                    की संख्या लड़कियों से अधिक थी एक लड़की शिक्षा का प्रयास करती है उसको

                 देख लोगो की सोच बेटियों के लिए बदलने लगती है

 

किरदारों की भूमिका=

 

लड़की =  जो मुस्किलो के आगे भी शिक्षा के लिए संघर्ष करती है

पिता  =   बेटी को पढ़ाने के लिए पंचायत का विरोध करते है ताकी  बेटी को शिक्षा मिल सके |

गाँव की महिलाये = अनपड होने के  एहशास के कारण गाँव की एक शिक्षित महिला बनती है

गाँव का जमीदार = खलनायक जो बेटियों के लिए गाँव के लोगो के मान में गलत भावना भरता है

पंचायत=  गाँव में बेटियों के अधिकारों को आगे न बढाकर अपनी राजनीती को चमकने में रहते है

मंत्री जी=  लड़की के एहसास कराये जाने पर गाँव में स्कूल और पुल को बनवाने का काम करते है

कुवारा लडका = शादी के लिए इधर उधर भटकता मगर लड़कियों का न मील पाना

कुवारे बूढ़े आदमी= कुवारे लड़के को शादी करने का तरीका बताते है

गाँव के दो परिवार = जिनके घर बेटियों का जन्म होता है

मास्टर जी , लड़की का भाई ,छोटी लड़की जिसको बेचा जाता है ,विदेसी सेलानी

पत्रकार ,गाँव के लोग , मंत्री जी के लोग  ,राज्य सरकार

 

 

2          एक लड़की ने ऐसे गाँव में जन्म लिया जंहा बेटियों के अधिकारों की

बात कोई नहीं करता था बेटियों को शिक्षा ही नहीं जन्म भी नहीं लेने दिया जाता है

एक दिन लड़की रेडिओ पर प्रधानमंत्री जी की मान की बातो को सुनती है उनका कहना था

बेटी बचाओ बेटी पढाओ सुनकर लड़की ने शिक्षा को अपनाते हुई पढने का फेसला करती है |

 

लड़की = घर में पिता और भाई के साथ रहती होती है

 

लड़की = अपने घर में गहरी चिंता से अपने पिता को बोलती है

पिता जी मुझको भी स्कूल जाना है | मुझे भी स्कूल भेजो में पढना चाहती हु |

पिता =  बेटी की बातो पर ध्यान न देते हुए बोलते है

तू कहा गायब रहती है तुझे मेरी मदत के लिए आना था फिर क्यों नहीं आई|

लड़की = दुबारा से अपने पिता को बोलती है

पिता जी मुझको भी स्कूल भेजो मेरे भाई की तरह में भी पढ़ना चाहती हु

पिता लड़की को समझाते हुऐ बोलते है  

इस गाँव में बेटियों को जन्म मिलना ही बहुत बड़ी बात है पढना तो दूर वेसे भी गाँव में

लड़कियों का कोई स्कूल नहीं है

 

लड़की = अपने पिता को समझाते हुऐ बोलती है

        आज मेने रेडिओ पर प्रधानमंत्री जी की मान की बातो को सुना उसमे वह बोल रहे थे की

        बेटियों को बचाओ और बेटीओ को पढाओ लेकिन बेटियों के बारे में तो कोई सोचता नहीं है

        और बेटियों को पढना जरुरी होता है नहीं तो   

        हमारे समाज का विकास पूरी तरह से नहीं हो पाता है

पिता =  लड़की की बातो को सुन कर परेशानी में पड़ जाते है क्युकी लड़की को पिता की मद्दत  के

लिए जाना पड़ता है और उठ कर काम के लिए चले जाते है

3      लड़की को पढाई से काफी लगाव हो जाता है लड़की अपने भाई की किताबो को पढ़ा करती है

एक दिन स्कूल के रस्ते से जाते समय लड़की मास्टर जी को देख रुक जाती है

लड़की स्कूल की खिड़की के पास बेठ कर समझने की कोशिस करती है की मास्टर जी क्या

पढ़ा रहे है और स्कूल खत्म होने से पहले वहा से चली जाती है घर आकर अपने भाई से

पुछती है की मास्टर जी ने आज तुझे क्या पढाया |

भाई =   लड़की की बातो को अनसुना कर देता है

लड़की = रोज ईसी तरह स्कूल की खिड़की के पास बेठ कर पढ़ती है और स्कूल खत्म होने से पहले   

              चली जाती है क्युकी लड़कियों का गाँव में कोई स्कूल नहीं था और लड़कियों को लड़को के

        साथ पढने नहीं दिया जाता था  

 

भाई         की रोज किताबे गायब हो जाती है

जिसको मास्टर जी अगले दिन पढने के लिए मगवाते है

 

भाई          बड़ा हेरान परेसान सा रहने लगता है सोचता है की मेरी किताबे कहा गायब हो जाती है

रोज वो अपने बेग में रखता है फिर भी कहा चली जाती है

वह किताब लड़की के पास होती है और वह स्कूल की खिड़की के पास बेठ कर पढ़ रही होती है|

 

भाई  = घर पर मास्टर जी की पूछी गई पहेली के बारे में सोच कर बड़ा परेसान स होता है तभी

 

लड़की = भाई को बोलती है

क्यों परेशानी में है  भाई को मास्टर जी की पुछी गई पहेली का जवाब बताती है   एक

सर्त पर की रोज भाई का स्कूल का होमवर्क लड़की को करने देगा भाई राजी हो जाता है

गाँव =  में लड़कियों का जन्माक इस्तर बहुत कम होता है और अगर जिस घर में लड़की होती भी

        है वो अपनी लड़की को स्कूल नहीं भेजते है

                क्युकी गाँव में पहली बात तो लड़कियों का कोई स्कूल नहीं होता और कोई परिवार वाले   

4           अपनी  लड़की को लड़को के स्कूल भेजना भी चाहे तो उनको पंचायत का सामना करना

                पढता है जेसे लड़की के पिता को एक बार करना पड़ा था

पंचायत =ने गाँव में एक ऐसा कानून बंना रखा था जिसमे महिलाओ के अधिकारों की बात कभी

नहीं की जाती थी और बेटियों के जन्माक इस्तर को बढ़ाने में कोई दिल चस्बी नहीं थी

अगर गाँव में किसी परिवार के यहा बेटी जन्म भी लेती तो उसको असली मर्द बनने को

कहा जाता है |

गाँव =  की पंचायत ने ऐसी परमपरा बना रखी थी

गाँव के कुवारे लड़को की शादी गाँव में या पास के गाँव में ही हो ताकी गाँव में किसी और

जाति समाज का प्रवेश न हो सके |

अगर कोई परिवार अपने लड़के या लड़की की शादी किसी और जाति समाज में करता है तो

उसको परिवार सहित गाँव से बहार का रास्ता दिखा दिया जाता है

 

.इसी तरह की परम्परा साथ के गाँव में भी थी

पास के गाँव में लड़कियों का जन्माक इस्तर तो ठीक ही होता है

मगर इसी गाँव में लड़कियों की संख्या कम थी .

गाँव = में जीतनी लड़कियों की शादी होती है उतने ही लड़को की भी शादी होती है मगर गाँव में

लड़किया नहीं थी इसलिए लड़को को कुवारा रहना पड़ता है

5          क्योकि इस गाँव में शादी के लायक कोई लड़की होती ही नहीं है

  गाँव =  में अब कुवारे लड़को की जनसँख्या एकदम तेजी से बढ जाती है

कुछ कुवारे लड़को की शादी की उम्र बहुत ज्यादा हो जाती है

           एक लड़का अपनी शादी को लेकर काफी परेशानी में हो जाता है

वो अपने परिवार वालो से शादी कराने के लिए बोलता है

 

कुवारा लड़का बोलता है

की मेरी शादी कब करोगे नोकरी न हो तो अलग बात है मगर नोकरी होने के बाद भी

सही उम्र पर शादी न हो सके लोग केसी केसी नजरो से देखते है की लड़का में लगता

है जान नहीं है इस लिए शादी नहीं कर रहा है ऑफिस में सभी बाते बनाते है

 

परिवार वाले बोलते है

गाँव में किसी भी घर में शादी के लायक कोई लड़की भी तो होनी चाहिए

किस्से कराए तेरी शादी|

 

कुवारा लड़का=बोलता है

अगर गाँव में नहीं है तो पास के गाँव में लड़की मील जायेगी

 

परिवार वाले बोलते है

तुझे तो पता है ही की गाँव में केसी परम्परा है

 

कुवारा लड़का=बोलता है

परम्परा के चक्कर में में कुवारा रहुगा पर ये नहीं होगा में इस गाँव में ही नहीं रहूगा

लड़का चला जाता है शादी को लेकर लड़का बडा परेशान हो जाता है      इसके आगे

       अब लड़का गाँव में रूप बदल कर गली गली शादी के लिए लड़की की तलाश करता

           है मगर उसको गाँव के किसी घर में लड़की नहीं मिलती है शादी के लिए |

 

गाँव =      में कई ऐसे कुवारे बूढ़े आदमी मील जाते है जो देखते देखते बूढ़े हो चुके होते है

 

 

 

 

6          लड़कियों की कमी के कारण उनको आजतक शादी के लिए कोई लड़की ही न मील पाई

           की उनकी शादी हो सके.|

 

बूढ़े कुवारे = आदमियों को पता चल जाता है

           ये लड़का शादी के लिए लड़की की तलाश में है उस कुवारे लडके का |

 

बूढ़े कुवारे = पहले तो मजाक उड़ाते है | जो गली गली लड़की की तलाश कर रहा होता है

 

बूढ़े कुवारे   बोलते है

काश हमारे दिमाग में भी यह तरकीब आ जाती | की

हम भी गली गली घूम लिए होते न तो आज हमारी भी शादी होई जाती|

अपने दोस्त को बोलता है

           दुसरे बूढ़े कुवारे को | कुवारे लड़के को सुनाते हुए

 

कुवारा लड़का बोलता है  गुस्से से लाल होकर

मुझे पता है तुम हमेशा कुवारे ही रहोगे लेकिन एक ना एक दिन मेरी शादी

हो ही जाएगी

 

दूसरा बुढा आदमी लडके का मजाक उड़ाते हुए बोलता है

सुन भाई अगर तेरा कोई दोस्त   है तो तू उसे शादी कर ले |अब तो कानून भी है

गाँव में तो तुजे कोई लड़की मिलेगी नहीं कम से कम कुवारा तो नहीं रहेगा |हमारी तरह

दोनों दोस्त हसने लगते है   लड़का परेशानी में सोचने लगता है  तभी दोनों  बूढ़े

 अब बूढ़े आदमी कुवारे लडके को समझाते है

देख भाई इसमें कसूर हम गाँव वालो का ही है क्युकी कोई भी गाँव का परिवार बेटी जन्मी करना

नहीं चाहता |

हमारे माता पिता की तरह और अगर गाँव में यदि किसी घर में बेटी ने जन्म ले भी लिया तो

जमीदारो के लड़को का रिश्ता वहा पहले पहुच जाता है |

क्युकी लड़की का सारा खर्चा बचपन से लेकर शादी तक जमीदार ही देता है ताकी बाद में कोई भी शादी के लिए मना नहीं कर सके सिर्फ हम जेसे ही कुवारे रह जाते है |

 

 

7          दूसरी और लड़की अपने पिता से पढने की जिद करती है

 

 पिता =    लड़की की बातो को सुनकर गहरी चिंता में पड़ जाते है सोचने लगते है की केसे

पंचायत से अपनी बेटी को स्कूल में पढने की मंजूरी लू की मेरी बेटी को भी स्कूल

जाना है

पिता =      लड़की को समझाते हुए बोलते है

बेटी घर परिवार में ज्यादा ध्यान दिया कर पढ़ के क्या मिलेगा और मेरी इतनी

हेसियत नहीं की में तुम दोनों को पढ़ा सकू |

गाँव =       के लोगो में एक ऐसी मानसिकता पनपने लगी होती है की लड़की जन्मी करी तो

            मुसीबत को अपने गले लगा लिया |

 

गाँव =       में जमीदारो ने एक ऐसी पंचायत बना रखी थी जो लड़को के जन्म से जुडी हो वो

समझने लगते है की लड़का हुआ तो उनका रुतबा घर और समाज में ज्यादा बढ गया

है |

            दुसरे गाँव में भी इसी तरह की परंपरा थी अमीर अमीर जमीदार अपने लड़को की

शादी में ज्यादा दहेज़ की मांग करते है |

कभी कभी तो लड़की के पिता की सारीजमीन

लडके के नाम करवाकर उसको परम्परा का नाम दे दिया जाता है

 

गाँव के दो परिवारों में नए बच्चो का जन्म होने वाला होता है

                    परिवार के दोनों आदमी आपस में दोस्त होते है कुछ महीनो पहले एक परिवार में

 

8           बेटी का जन्म हो जाता है कही जाते समय गाँव का एक जमीदार जन्मी बेटी के

            पिता को रोकता है दोनों आदमी जमीदार को नमस्ते करते है जमीदार बेटी जन्मी पर

अपना ज्ञान दोनों दोस्तों को देता है

 

         जमीदार =बोलता है

सुन भाई मेने सुना है की तेरे घर में एक बेटी ने जन्म लिया है

बेटी जन्मी मत कर जो तू कमावे वो दुसरे घर ले जाये |

                            लड़की जवान हुई तो

उसके साथ शादी की पारेसनी की कसके साथ शादी हो बेटी जन्मी करने से लेकर

देख भाल पिता करे बाद में ऐसे लडके के साथ शादी करा दे जो उसपर अपना हुकम

जमावे |

 

                            अगर लड़का अच्छा मील जये तो

दहेज का चक्कर कितना देना पड़े कितना

चाहिए और आजकल तो जमीन देनी पड़े और साथ में केश पैसा और गाड़ी चाले है|

 

                              तू कितना कमावे है

और भगवान् न करे की लड़की जवान होते समय प्यार व्यार के

चक्कर में पड़जाये तो सारे गाँव में नाक कटवा दे की केसी लड़की जन्मी है

 

               अगर दूसरी जाति विरादरी में शादी करके भाग जाये न मुह छुपता फिरियो तेरे

परिवार का नाश करदे |

 

                             अब सुन लड़का तो मर्दों की निशानी होती है जो कुछ भी तेरा है वो तेरे पास ही

रहेगा |

 

                             तेरा वंश भी बड़ेगा गाँव के एक आदमी के बारे में नाम बता कर

बताता है की उसके चार चार लडके है

 

दोनों दोस्तों को एक लड़की के बारे में बत्ताता

है की उस लड़की ने गेर जाति में शादी की और गाँव की पंचायत ने लड़की को

 

 

9  उसके पुरे परिवार सहित गाँव से बहार निकाल दिया और उसकी जमीन पर कब्ज़ा कर लिया|

        एक लड़की ने पुरे परिवार का नाश कर दिया|

दोनों दोस्त गहरी चिंता में सोचते हुए अपने अपने घर चले जाते है

दोस्त =   जो जमीदार की बाते सुनकर आया होता है अब जिसके घर बच्चे का जन्म होने

वाला होता है

 

  पति          घर जाकर अपनी पत्नी से बोलता है

की बेटा ही जन्मीयो बेटी नहीं चाहिए मुझे बेटा चाहिए |

 

गाँव के एक घर का नाम बताते हुए

उसके घर देख  चार चार लड़को का जन्म हुआ है

जिसके बारे में जमीदार ने दोस्तों को बताया होता है

                   की मुझको बेटी नहीं चाहिए नहीं तो गाँव में नाक कट जाएगी |

पत्नी बोलती है

लड़का या लड़की जन्मी करना हमारे बस की बात है  हमे क्या पता

की क्या होगा |

पति बोलता है

की गाँव के आदमी का नाम बताते हुए की चार चार

लड़को ने जन्म लिया है जाकर पूछ की क्या खिलते है      

          वो अपनी बहुओ को जाकर पता कर

 

.पत्नी बोलती है  

                       कुछ भी ऐसा नहीं खाती वो जिससे की लड़का ही हो बस वो बेटी नहीं जन्मी करते

          क्युकी वो लोग बेटियों को पेट में ही मार डालते है बस इतना करते है पर आज क्या

होगया आपको जब से अये हो इस तरह की बाते कर रहे हो

 

पति       पत्नी को बोल कर अपने कमरे से चला जाता है

इसके बाद

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