Irade

शैली (Genre): – स्पोर्ट एक्शन, इमोशनल ड्रामा.
प्रेमिस (Premise): – कुछ करने का पक्का इरादा कर लिया तो कामियाबी जरुर मिलती हैं.
थीम (Them): – अपनी मंजिल को पुरा करते वक़्त रस्ते में बहोत सी परेशानीया आती हैं लेकिन उन परेशानियों से डर के पीछे हटने के बजाए उस का डट कर मुकाबला करने से ही मंजिल मिलती हैं. मंजिल पास आते-आते अपनों का साथ छुट जाए तब-भी अपनी मंजिल को हासिल करके अपना इरादा पुरा करसकते हैं.
यह कहानी हैं एक इंसान की जिस का नाम साहील था. साहील उस का नाम जरुर था लेकिन साहील को अपनी जिंदगी का किनारा कभी नहीं मिला. साहील का आज 50 वा जन्म दिन था इस मौके पर एक टीवी चैनल पर साहील का इंटरव्यू था. उस इंटरव्यू में साहील अपनी पूरी जिंदगी की कहानी बताता हैं.
साहील:- मुझे एक छोटी बहेन और छोटा भाई हैं. मै जब पहेलवानी सिख रहा था तभी मेरे बाबा इस दुनिया को छोड़ गए थे. शराब बहोत पीने की वजह से वह इस दुनिया को जल्द ही छोड़ गए. मुझे मेरे बचपन से ही काम करके अपना और अपने घरवालों का पेड़ भरना पढता था. मैने कभी-भी इन बातों को अपने इरादों के आड़े नहीं आने दिया. हर सुबह जल्दी से उठकर मै अपनी कसरत और रनिंग किया करता था. फिर स्कूल को चला जाता था. स्कूल सिर्फ इंटरवल तक-ही किया करता था ताके अपने काम पर जा सकू. मेरे मालिक बहोत अच्छे थे. मुझे कभी काम पर आने में देरी हो गई तब-भी कुछ नहीं कहते थे. इस तरह से मैंने अपनी दसवी तक की पढाई पूरी की और कसरत करके थोडी सी बॉडी बनाली थी.
जैसे जैसे मेरी उम्र बड़ी उसी तरह घर की ज़िम्मेदारी भी बढती गई. घर की ज़िम्मेदारी और मेरा सपना पुरा करने के लिए मैंने अपने गांव से कुछ दुर एक अखाड़े में नौकरी की जन्हा पर बच्चों को पहेलवानी सिखाई जाती थी. जो लड़के काम करते थे उन्हें रहेना और खाना मुफ्त था. इस लिए जो भी महीने की मेरी पगार थी वह पूरी की पूरी अपने घर भिज्वादेता था. मै पुरा दिन वंहा काम करते-करते जो सिखाया करते थे बच्चों को मै वह देख कर सीखता और रात में सब चले जाने के बाद अकेले ही वह देखा हुवा प्रैक्टिस किया करता था. पहले-पहले मुझे प्रैक्टिस करता देख वंहा के कुछ बच्चे मुझे देख कर मेरा मजाक किया करते थे मै उनको नज़र अंदाज़ करके अपना ध्यान अपनी प्रैक्टिस पर लगाता था. इस तरहा कुछ दिन बीद गए. एक दिन फिर दुबारा उन लडको ने मेरा यह कहेकर मजाक किया. “चाय और तोस खा कर कोई भी पहेलवान नहीं बनता” काम करने आया हैं काम ही कर नहीं तो सीखने के नाथ में मर जाएगा.
मैंने उन्हें एक बात कही जिसे सुनकर वह लड़के चले गए. महादेव सर उनके जाने के बाद मेरे पास आकर कहा. तुम यंहा काम करने आए हो या सीखने. महादेव सर उस अखाड़े के मालिक थे. उनका एक बेटा था जो जवानी में ही मर गया था. महादेव सर दिल के बहोत साफ़ इंसान थे. वह हर रोज़ मुझे दूर से देख कर चुप-चाप चले जाते. मैंने उस के सवाल का जवाब दिया. मेरी बात सुन कर कुछ और बात किए बिना वंहा से चले गए.
इस तरह कुछ और महीने बीद गए. एक दिन पहेलवानो की कुश्ती का मैच रखा गया जिस में महादेव सर के पहेलवान की और दुसरे अखाड़े के पहेलवान की कुश्ती थी. दुसरे अखाड़े के पहेलवान का नाम अन्नौंस हुवा फिर महादेव सर के पहेलवान का नाम अन्नौंस हुवा तब मै बहोत परेशान हो गया था क्यों के मेरा नाम महादेव सर ने दिया था. महादेव सर ने मुझ से कहा “तुम्हारे साथ मै हूँ डर ना मत”.
सर की यह बात सुन कर मैंने सोंचा के जान भी क्युंना चली जाये फिर भी हार नहीं मानुगा. चालेंजेर बार-बार मुझे बातों से निचा दिखा रहा था. तब मुझे और जादा गुस्सा आ गया और मैंने उसे कहा. “ मै घोड़े के ट्रिगर पे नहीं खुद के जिगेर पर जीता हूं. यह मेरी जिंदगी का पहला मैच था जो मै जीत गया और वंही से शूरों हुवा मेरा पहेलवान बननेका सफ़र. महादेव सर ने मुझे फ्री में सिखाते थे और मेरी जो पेमेंट थी वह भी दिया करते थे.
महादेव सर की वजह से मै बहेतर पहेलवान बन गया. मेरे पास अब पैसे होगया. मैंने अपने चोटे बहेन भाई की शादी करके उन को कारोबार को लगवा दिया. माँ ने मेरे शादी के लिए बहोत मुझसे बहोत कहा लेकिन मुझे मेरा सपना पुरा करना था इस लिए मैंने शादी नहीं की एक दिन मेरी मुलाकात पायल से हो गई. कुछ और बाते हो गई जिस्से मैंने पायल से शादी करने का फैसला किया. माँ को मेरी शादी होते हुवे देखना था. मुझे माँ को दिखाना था देश का सबसे बहेतर पहेलवान बनकर लेकिन शादी के दिन ही माँ मुझे छोड़ चली गई. मुझे कुछ वक़्त लगा इस सदमे से बाहर आने में फिर मैंने अपना सपना पुरा किया. Olympic में गोल्ड मेडल जीता और फिर पायल से शादी की. शादी के दिन महादेव सर ने वह वडा याद दिलवाया जो मैंने मेरी प्रैक्टिस के दिनों में किया था महादेव सर से.
महादेव सर का सपना था उनका बेटा उनके लिए बॉक्सिंग में World Heavyweight Champion का बेल्ट जीते लेकिन उनके बेटे को बॉक्सिंग जम नहीं रही थी उसे लगा के बॉक्सिंग जीत न मेरे बस की बात नहीं है. यह बात मै अपने पिता से कैसे कहु इस लिए. इस लिए उस ने खुद ख़ुशी की. महादेव सर मुझे अपना बेटा समझ ते थे इस लिए यह वादा लिया था के मै उनका यह सपना पुरा करूं. अब मेरा सपना पुरा हो गया था लेकिन मुझे अपनी माँ को दिखाना था जो मै दिखा नहीं पाया. मैंने महादेव सर के सपने को पुरा करने की कसम खाली. मेरी बॉक्सिंग के कोच महादेव सर के दोस्त और उनके बेटे के भी कोच थे उनका अनिल नाम था.
मेरी शादी अभी हुवी थी इस लिए अनिल सर ने मुझे एक महीने की छुट्टी दी और कहा अगले साल ही World Heavyweight Champion का मैच हैं इस लिए आगे तुम्हे एक भी छुट्टी नहीं मिलेगी और एक बार तुमने बेल्ट जीता तो आगे हर दिन छुट्टी ही छुट्टी.
मेरी एक महीने की छुट्टी ख़त्म होते ही अनिल सर ने मेरी बॉक्सिंग के ट्रेनिंग शुरों करदी. इस तरह से ९ महीने बीद जाने के बाद मेरे बच्चे का जन्म हुवा. उस दिन मै अपनी बीवी के पास था उसे हॉस्पिटल से अपने घर ले जा रहा था मेरी गाड़ी में मै आगे की सीट पर मेरे बेटे के साथ बैठा था और पिछली सीट पर पायल और महादेव सर बैठे डे कुछ डोर जाने के बाद आचानक एक ट्रक ने हमारी गाड़ी को जोर से टक्कर मरी मैंने अपने बचे की जान तो बचाई पर पायल और महादेव सर को मै नहीं बचा पाया.
मै मेरे बच्चे के लिए और दुसरे लोगों को मिसाल बन्ने के लिए उस सदमे से भी जल्द बाहर आ गया और championship का बेल्ट जीत गया उस मैच के बाद से मैंने किसी से भी हार नहीं मानी लेकिन हालात ने मुझे हरबार बेबस और लाचार बना दिया था. मै जी रहा हूँ तो सिर्फ इस लिए जी रहा हूँ के दुसरे लोग जो खुद पर परेशानी आ गई तब उससे लाचार होकर अपनी जिंदगी को ही ख़त्म करदेते हैं और कुछ जीते हैं पर शराब के सहारे इन जैसे बुज्दील को इंसान नहीं कहते. मेरे इरादे और अपनों की वजह से मै यंहा पर इस मुकाम पर हूँ. मेरी तन्हाई मेरी बहेतरीन साथी थी जो मेरे मरने के बाद ही मेरा साथ छोड़ेगी.
आप के ज़र्रिए मेरे बेटे को एक सलहा देना चाहता हूँ. कभी जिंदगी में बुरे दिन से तुम रूबरू हो जाओ तो इतना हौसला जरुर रखो, दिन बुरा था जिंदगी नहीं. जिंदगी जीने का और जिंदगी में कभी भी हार नहीं मानने का इरादा करना. ऊपर वाले से मै यंही दुवा करता हूँ जिंदगी में मुझे जो ख़ुशी नहीं मिली वह तुम्हे मिले.

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