khubi+Mehnat=Kaamiyabi

शैली (Genre): – स्पोर्ट एक्शन, ड्रामा.
प्रेमिस (Premise): – जुनून से कुछ करने का पक्का इरादा कर लिया तो कामियाबी जरुर मिलती हैं.
थीम (Them): – हम सब को एक अलग हुनर भगवान ने दिया हैं. उस गुन को उस कला को हम अपने बचपन में समझ ले तो उस हुनर से अपनी जिंदगी आसानी से गुजार सकते हैं. कुछ बच्चे अपने बचपन में ही उस हुनर को पहचान कर उससे अपनी जिंदगी गुजारते हैं और कुछ बचे अपने उस हुनर को पहचान नहीं पाते. इस लिए चाहिए के बचों के टीचर बचों में हमेशा उनके हुनर को तलाशे कौनसा बच्चा किस में माहिर हैं. खेल में या फिर पढाई में अगर पढाई में बहोत हुशार हैं तो वह किस विषय में उस का जादा मन लगता हैं. यह सारी बातें हर टीचर को समझ में आनी चाहिए.
यह कहानी हैं एक 45 साल के इंसान की जिसका नाम राम था. राम को खेलों में बहोत दिल-चस्बी थी. राम को कॉलेज में टीचर की नौकिर थी. राम सर गणित विषय पढ़ाते थे. राम सर ने अब-तक शादी नहीं की थी. इस के दो कारन थे कोई लड़की पसंद नहीं आई और अकेला रहेना पसंद था.
राम सर जब-भी खेल के मैदान से गुज़रते वंहा खेल-खेलने वालें लड़के कुछ गलती करते नज़र आते उन्हें फ़ौरन राम सर उसे उसकी गलती बता देते. बच्चों को खेल सिखाने के लिए जो सर थे उनका नाम रवि था. रवि सर राम सर पर गुस्सा होते लेकिन अब-तक उन्होंने अपने गुस्से को बाहर नहीं लाया था. बहोत दिनों तक राम सर की इस बात को बरदाश किया लेकिन आज राम सर ने जब एक लड़के की गलती को उसे बतलाया तब रवि सर ने राम से कहा.
रवि सर:- आप अपना काम कीजिए मुझे पता है इन बच्चों को किस तरह और कैसे खेलना सिखाना हैं.
राम सर:- हाँ दिखाई दे रहा हैं आप कितनी अच्छी तरह से बच्चों को सिखा रहे हैं. मैदान पर आते हैं और एक तरफ कुर्सी पर बैठजाते हैं वंही बैठे-बैठे नाश्ता, चाय, आप की हो जाती हैं. आप यह भी नहीं देखते के कौनसा बच्चा किस तरह खेल रहा हैं. या वह जो खेल, खेल रहा हैं उस में उसकी दिलचस्बी इस खेल में नहीं दुसरे खेल, खेलने में हैं. पढाई से भी इनकी जिंदगी संवर सकती हैं और खेल से भी. जिस तरह अच्छा पढोगे लिखोगे तो बनोगे नवाब ठिक उसी तरह से अच्छा खेलोगे तब-भी नवाब बनोगे.
रवि सर:- आप ही क्युना कल से मेरी जगह इन बच्चों को सिखाया करो. आप को मुझसे जादा खेलों की जानकारी हैं शायद.
राम सर:- मुझे पता था आप यंही कहोगे. आप को ही यह पता नहीं हैं शायद की अच्छा खिलाडी बनने से इनकी जिंदगी संवर सकती हैं. खेल से बचों की सेहत पर अच्छा असर पढता हैं. जब नौकरी लगेगी तब इस खेलों के सर्टिफिकेट इन की बहोत मदत करेंगे. आप जैसे सरों की वजह से तो इस देश को जादा से जादा खिलाडी नहीं मिल रहे हैं. इन बच्चों के लिए जो भी खेल का सामान आता हैं वह आप अपने घरों में ले जाते हैं या तो फिर स्कूल के लाकर में रख देते हैं. आज से मेरा एक ही मकसद होगा इस गांव से एक नहीं बल्कि जितने खिलाडी होंगे उतने खिलाडीयों को एक महान और बहतरीन खिलाडी बनाऊंगा वह भी अलग-अलग खेलों में यह मेरा वदा रहा.
अगले दिन से राम सर ने हर बच्चे पर अपनी नज़र रखी ताकि इस बात का पता चल सके के कौनसा बच्चा किस खेल में माहिर है या उसे कौनसा खेल खेलना पसंद हैं. यह महनत सिर्फ एक बार ही करनी पढेगी फिर बाद में खुद-ब-खुद बच्चे अपनी दिलचस्बी बताएंगे और खेल में उनकी रूचि बढ़ेगी.
एक लड़का बहोत ही शरारती था, बहोत ही चुल-बुला था, हमेशा इधर-उधर फिरता रहता. एक जगापर जादा देर तक नहीं बैठता था. उस लड़के का नाम रूद्र था. राम सर को लगा यह लड़का अच्छा रनर बन सकता हैं. राम सर ने रूद्र को ट्रेनिंग देने से पहले रूद्र को परखा के वह एक अच्छा खिलाडी बन सकता हैं की नहीं. रूद्र राम सर के इम्तिहान में पास हो गया और राम सर उसे खुद रनिंग की ट्रेनिंग देने लगे. अब राम सर को तलाश थी अपने दुसरे विध्यार्ती (खिलाडी) की.
अगले ही दिन राम सर की नज़र एक लड़के पर पड़ी जो अपने दोस्तों से यह कह रहा था. मेरे साथ भी एक चेस का गेम खेलो. उस लड़के का नाम रोहित था. उसके दोस्त कहते हैं. तुम्हारे साथ खेल के मतलब नहीं हैं क्योंकी तुम हमेशा जीत जाते हो. राम सर उनके करीब जाकर कहते हैं.
राम सर:- हम सब एक तरफ हो जाते हैं और तुम अकेले खेलोगे मै भी देखता हूँ किस तरह तुम जीत ते हो हमसे.
कुछ ही देर में रोहित ने राम सर की टीम को हरा दिया. तब राम सर को लगा यह लड़का चेस खेल में महारत हासिल कर सकता हैं. यह बात रोहित से कही राम सर ने तब रोहित ने राम सर का जवाब कुछ इस तरह दिया.
रोहित:- सर आप ने जो मेरे लिए कहा उसके लिए बहोत-बहोत शुक्रिया लेकिन मै अपनी जिंदगी इस खेल की वजह से नहीं बर्बाद कर सकता हूं. इस खेल को वक़्त दिया तो मेरी पढाई पीछे रह जाएगी.
राम:- तुम यह क्यों सोचते हो की सिर्फ और सिर्फ पढाई से ही जिंदगी में पैसे कामये जाते हैं. हाँ जिंदगी में पढाई बहोत अहेम है लेकिन पढाई से ही घर चलता हैं यह सही नहीं हैं.
रोहित:- सर आप सही हैं लेकिन मुझे तो सिर्फ पढाई करके ही अपने घरवालों को कुछ बन कर दिखाना हैं.
यह कहे कर रोहित वंहा से चला गया और राम सर को दूसरा खिलाडी मिलते-मिलते रहे गया. राम सर ने बहोत कोशिस की रोहित को समझाने की लेकिन ना काम रहे. राम सर फिर दोबारा तलाश करने लगे अपने अगले खिलाडी की खोज में. एक दिन राम सर के पास एक लड़की आई उस का नाम अस्मिता था.
अस्मिता:- सर मुझे खेलों में बहोत दिल-चस्बी हैं क्या आप मुझे भी खेल खेलना सिखाओगे क्या.
राम सर:- हाँ क्यों नहीं पर तुम कौनसा खेल बहोत अच्छे से खेल सकती हो.
अस्मिता ने उस के निशानीबजी के बारें में बताया और राम सर ने अस्मिता के नेशाने का टेस्ट लिया जब राम सर को भरोसा हो गया के यह सही में एक अच्छी निशाने बाज़ बन सक्ति हैं तब जाकर अस्मिता को राम सर सिखा ने लगे. अब राम सर के पास दो खिलाडी हो गए थे. इन बच्चों को जो भी सामान की जरुरत होती राम सर अपने खुद के पैसे खर्च करके इन दोनों की जरूरतें पूरी करते. कुछ दिन बित जाने के बाद एक दिन राम सर ने अपने स्कूल में छोटा सा खेल का एक प्रोग्राम रखा जिसमें इन दोनों के अलावा कुछ और बच्चे भी हिस्सा लिया. रूद्र के साथ चार बच्चों ने दौड़ में हिस्सा लिया. दौड़ शुरों हो गई कुछ ही देर में रूद्र ने सबको पीछे छोड़ते हुवे दौड़ जितली. अब बरी थी अस्मिता की.
निशानेबाजी के खेल में सिर्फ अस्मिता ने ही हिस्सा लिया दुसरे बच्चों को ठिक से हाथ में धनुष पकड़ना भी नहीं आता था. राम सर ने खेल में रोमाच भरने के लिए कांच की दस बोतल अलग-अलग जगह पर राखी और एक बोतल अपने सर पर रखी. अस्मिता ने सारी बोतले फोड़दी. स्कूल के हेडमास्टर ने राम सर के इस काम को बहोत सरहा. तब एक बच्चा बैसाखी के सहारे चलते-चलते राम सर के पास आकार कहता हैं. उस लड़के का नाम अभी था.
अभी:- सर मुझे भी एक खेल में बहोत दिल-चस्पी हैं क्या आप मुझे उस खेल में माहिर खिलाडी बनाओगे.
रवि सर अभी की बात सुनते ही उसका मजाक उड़ाकर उसका हौसला पस्त करते हैं. रवि सर की हरकत पर राम सर उनकी ही बेज़ती करते हैं. अभी का हौसला बढ़ाते हैं और अभी को भी सिखाने का वादा करते हैं. अभी को Discus Throw Game में बहोत दिलचस्पी थी. अभी के साथ राम सर जा रहे थे तब राम सर की नज़र रोहित पर पड़ती हैं.
राम सर:- रोहित अबभी वक़्त हैं एक बार फिर अपने मुस्तकबिल के बारे में सोंचो क्योंके वक़्त किसी के लिए भी नहीं रुकता. कल काश कहने से बेहतर है के आज उसे पुरा किया जाए.
रोहित पर राम सर की बातों का कोई भी असर नहीं हुआ. जैसे ही राम सर की बातें ख़त्म हो गई रोहित वंहा से चुप-चाप चला गया. राम सर खड़े के खड़े बस रोहित को जाता देख रहे थे.
रवि सर अपने मन में राम सर से बदला लेने का ठान लिया. अगले दिनसे ही रवि सर ने राम सर और अस्मिता के बारें में बहोत सी गंदी अफवा फैलाई जिस से राम सर को बहोत बरेशानी का सामना करना पड़ा. इस तरह की बहोत सी रुकावट रवि सर ने डाली राम सर के रस्ते में लेकिन राम सर ने इन रुकावटों का डटकर सामना किया और उन्हें पार किया. रवि सर की रुकावटें ख़त्म हुवी की राम सर के सामने पैसों की परेशानी आ गई और राम सर ने उसे भी आ सानी से हल कर दिया. राम सर की महेनत को देखकर रोहित भी राम सर के कहने पर खेल ने लगा.
दोनों नेता मिलकर अगले दिन ही राम सर की मौत का प्लान बनाते हैं. अपने प्लान में वह कामियाब हो जाते हैं.
हमारे देश में यह अक्सर होता हैं जब कभी कोई एक अच्छा और सब से हटके कम करता हैं तब उसको हम सब मिलकर गलत ठहराते हैं, और बुरा-भला कहते हैं, उस का मजाक बनाते हैं. जब वह इन्सान अपने मकसत में कामियाब होता हैं और वह इस दुनिया से चला जाता हैं. तब उसकी तारीफ करते हैं, उसकी बड़ी-बड़ी समाधी बनाते हैं. उसके मरे हुवे दिन पर सारे कामकाज बंद करवाते हैं.
हम आपको यह बताएंगे की राम सर जिंदा रहते हैं या नहीं, और वह दो नेता कौन थे और उन्हों ने राम सर को मारना क्यों चाहते थे. उन बच्चों का खेल कहां तक पहूंचता हैं. किसी बच्चे की खूबी को उसकी म्हणत से तराश के उस बच्चे को कामियाब और काबिल किस तरह बनाया जासकता हैं.
यह सारी बातें हम आगे बताएंगे.

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