NAKAAM PATI AUR CHALU AURAT

Comedy:-

Written By Mohammad Irfan

लाला सच्चे प्रशाद(50) जो काफी निराश और परेशान हें क्योंकि उनकी पत्नी का देहांत हो चूका है और उनपर कोई औलाद भी नहीं है और उनकी उम्र भी 50 के लगभग है | लाला जी लगातार अपनी दूसरी शादी की फिराक में लगे हुए हें लेकिन उनकी उम्र के रहते लड़की शादी के लिए नहीं मिल पा रही है |

लाला जी को एक जगह लड़की मिली जो मनचले स्वभाव की है | जिसका नाम चंपा(30) है और उसके परिवार वाले इस शादी के लिए राजी हो जाते हें | शादी हो जाती है | कुछ समय पश्चात एक दिन लाला पडौसी को घर में पाकर पत्नी पर गुस्सा होता है और चंपा अपने आप को ये कहकर बचा लेती है की कमरे में कुछ भारी सामान को उठाने में मदद के लिए पडौसी को बुलाया था और लाला मुनासिब सुबूत न पाकर कुछ नहीं कर सका और लाला को जब पत्नी के लछन कुछ संदेह जनक लगे तो उन्होंने घर की इज्जत बरकरार रखने के लिए बस्ती से दूर एक घर लिया और वहा रहने लगे ये सोचकर की यहाँ पत्नी लोगो से नैन मटक्का नहीं करेगी |

लाला :- घर से बाहर नहीं निकलना है घर के आस पडौस खतरा हो सकता है … में काम पर जा रहा हूँ और बाहर से दरवाज़ा बंद कर के जाऊंगा और में शाम को वापस आऊंगा |

चंपा :- ठीक है जी …

लाला ताला लगा कर दूकान पर चला गया. दूकान पर खुशहाल सिंह(30) जो लकडहारा है लकड़ियाँ लिए लाला का इन्तेजार कर रहा है अपनी लकड़ी लाला को बेचने की लिए | लकड़ियों का इस्तेमाल लाला अपनी मिठाई की दूकान में करता है |

खुशहाल सिंह :- राम राम.. लाला जी बड़े खुश दिखाई पढ़ रहे हो आज …..

लाला :- अरे कई दिन बाद लकड़ियाँ लाया है …. क्या हुआ सब कुशल मंगल तो है ?

खुशहाल सिंह :- (दुखी मन से निराशा पूर्वक)…लालाजी धंदा बड़ा मंदा है कब तक जंगल से लकड़ियाँ काटता रहूँगा,…पिताजी ने नाम तो खुशहाल रखा मगर हाल बेहाल है, …. सोच रहा हूँ कुछ और काम की तलाश करूं |

लाला :- (लकड़ियों के पैसे देते हुए)…अरे बेबकूफ रोजाना कुछ न कुछ कमा लेता है और तुझे क्या चाहिए … अपने इसी काम में लगा रह भला और क्या करेगा |

खुशहाल सिंह :- (खफा स्वभाब से देखते हुए)…..अच्छा लाला चलता हूँ ….

खुशहाल सिंह बस्ती से काफी दूर निकल आया और चला जा रहा है बिना किसी मंजिल के | अब उसे काफी तेज प्यास लगी मगर आस पास कोई पानी नहीं | बो कुछ और आगे चला और उसे एक मकान नज़र आया | और बो मकान के नज़दीक गया तो देखा बाहर से ताला लगा है हताश और परेशान हुआ और बे सहारा इधर उधर झाँक रहा था उसे कोई नज़र नहीं आया ……

अचानक तभी ऊपर मकान पर खड़ी चंपा ने उसे देखा तो उसकी आँखों में चमक आई और उसे शरारत सूझी

चंपा :- (झांकते हुए और मीठी आवाज में)…. क्या चाहिए किसकी तलाश है…

खुशहाल सिंह :- (ऊपर देखा और चेहरे पे एक ख़ुशी की झलक आई)….पानी की तलाश है …. में बहुत प्यासा हूँ, अगर कुछ पानी मिल जाए तो आपकी बड़ी मेहरबानी होगी |

चंपा :- (शरारत भरी निगाहों से देखते हुए)…पानी है और खाना भी मगर उसके लिए अन्दर आना होगा ..

खुशहाल सिंह:-  मगर ताला लगा है ….

चंपा ने तुरंत साडी छज्जे से बाँध कर लटका दी और खुशहाल ऊपर चढ़ के अन्दर गया …

खुशहाल ने वहाँ खाया और पिया और दोनों ने रंगरलियाँ खूब मनाई  ….चंपा ने कहा की आप कहाँ जा  रहे थे. उसने कहा की काम की तलाश में जा रहा था …..चंपा ने कहा की समझो काम मिल गया …तुम रोजाना यहाँ आओ और 100 रुपये रोजाना मिलेंगे. खुशहाल ने 100 लिए और चला गया…. बाज़ार में लाला के पास पहुंचा और कहा … लाला जी काम मिल गया और बहुत शाही नौकरी है.

लाला :- क्या काम है |

खुशहाल :- में जंगल से गुजर रहा था और बहुत प्यासा था की एक मकान दिखाई दिया और वहाँ पानी माँगा लेकिन पानी ही नहीं खाना और पैसे भी मिले और साथ ही वहाँ की मालकिन ने मुझे बहुत प्यार दिया …. और मेरी ड्यूटी रोजाना के लिए तय हो गयी.

लाला समझ गया की वो उसी के घर गया था…

लाला घर पहुंचा और अगले दिन ड्यूटी के लिए तेयार होने लगा …. और चंपा से खाना पैक करने को कहा… चंपा ने खाना पैक कर दिया और लाला निकल गया….और ताला लगा दिया.

लाला सोचने लगा की आज में इसे रंगे हाथों पकड़ लूँगा….

खुशहाल अपने वक्त पर आया और उसी तराह चंपा ने उसे ऊपर चढ़ा लिया और अंदर से दरवाज़ा बंद कर लिया …और उन दोनों की रंगरलियाँ शुरू हो गयीं. उनकी रंगरलियाँ चल ही रही थीं की लाला वापस चुपचाप घर पहुँच गया और ताला खोल कर तुरंत अंदर घुसना चाह लेकिन अंदर से देवाज़ा बंद था तो उसने चंपा को आवाज़ लगाईं…

आवाज़ सुनते ही दोनों में खलवली मच गयी और उसने खुशहाल को जल्दी से घर में खडी अरहर की लकड़ी की गड्डी के बीच में खुशहाल को लिटा कर गड्डी को बाँध दिया और एक तरफ कौने में खड़ा कर दिया. और जल्दी से आकर दरवाज़ा खोला.

चंपा :- अरे आप इस वक्त कैसे आ गए दूकान पर नहीं गए क्या ?

लाला :- अरे मेरे पेट में कुछ परेशानी है तबियत ठीक नहीं इस लिए चला आया…तू जल्दी से मेरे लिए चाये बना …..

चंपा चाये बनाने चली गयी और तुरंत लाला खड़ा हुआ और घर में जल्दी से छान बीन करने लगा वाशरूम और घर के दुसरे कमरों की तलाशी ली और सब देख कर आकर चारपाई पर बैठ गया… लेकिन लाला को कुछ नहीं मिला…

चंपा चाये लायी और लाला ने चाये पी और कुछ देर आराम किया और फिर दूकान पर चला गया….

लाला अपनी दूकान पर चला गया और खुशहाल का इंतज़ार करने लगा….कुछ देर बाद खुश हाल आया और लाला ने कहा

लाला :- अरे भाई आज काम पर नहीं गए क्या…?

खुशहाल :- लाला जी काम पर तो गया मगर बड़ी जान जोखम में पड़ गयी थी आज तो

लाला :- क्या हुआ…?

खुशहाल :- उसका आदमी आ गया था मगर उस भली औरत ने मुझे बचा लिया मुझे घर में ही अरहर की लकड़ियों में छुपा दिया ये देखो लाला जी तमाम लकड़ियाँ चुभ गयी….आदमी के जाने की बाद तनख्वाह दे कर निकाल दिया.

लाला :- तो ड्यूटी पर फिर जाओगे ?

खुशहाल :- हाँ जाना तो पड़ेगा भला ऐसी आराम दायक नौकरी अब कहाँ लाला जी और फिर रिस्क न हो तो काम में मजा कहाँ.

लाला अंदर ही अंदर गुस्से से काँप रहा था …..कुछ देर बाद खुशहाल चला गया ….और लाला ने सोचा की अगले दिन रंगे हाथों इन दोनों को पकड़ लूँगा फिर औरत की सारी अकड़ निकाल दूंगा.

अगले दिन लाला फिर घर से तेयार होकर दूकान के लिए निकला और बाहर से ताला लगा दिया…..

वक्त की मुताबिक़ खुशहाल पहुंचा और ऊपर चढ़ गया …..और रंगरलियाँ शुरू हो गयी….कुछ देर बाद लाला ने गेट खटखटाया और दोनों के रंग में भंग पढ़ गया…..खुशहाल डर के मारे कांपने लगा चंपा ने उसे समझाया….और उसे बिस्तर के बीच लपेट कर तय बना दिया और एक तरफ रख दिया…..और जल्दी से दरवाजा खोला

चंपा :- आज कल आप का ध्यान काम में नहीं है….बापस क्यूँ आ गए

लाला :- कई दिन से तबिय्यत ठीक नहीं चल रही…. कुछ आराम कर लूं फिर जाऊँगा….तू जाकर मेरे लिए चाये बना ….चंपा गुस्से में चाये बनाने चली गयी और लाला ने घर में कई जगाहों पर तलाशी ली और कौने में खड़ी  अरहर की लकड़ियों की गड्डी को आग लगा दी मगर उसमें कोई आदमी न निकला…..

चंपा :- ये लकड़ियाँ क्यों जला डाली…?

लाला :- ये मुझे घर में अच्छी नहीं लग रही थी….

लाला ने कुछ देर आराम किया बाद में दूकान पर चला गया …..

खुशहाल लाला की दूकान पर फिर आया और

लाला :- तुम आज काम पर नहीं गए क्या….?

खुशहाल :- गया था और तनख्वाह भी मिली मगर आज तो मरते मरते बचा….में ड्यूटी पर था की उसका आदमी आ गया और गड्डी  में आग लगा दी …..अगर में गद्दी में होता तो जल कर भस्म हो गया होता….मगर उसने मुझे बिस्तर में लपेट कर रखा था……

लाला :- ड्यूटी पर फिर जाओगे…?

खुशहाल :- 100 रूपए दस दिन में कमा पाता हूँ ….ड्यूटी पर तो जाऊंगा जनाब.

लाला मन ही मन बहुत गुस्से में था ……कुछ देर बाद खुशहाल चला गया…

अगले दिन लाला फिर दूकान के लिए निकला …. और खुशहाल रोज की तराह पहुँच गया….दोनों मस्त हो गए….लाला वापस आ गया और गेट खटखटाया …..दोनों की मस्ती भंग हो गयी……जल्दी से चंपा ने खुशहाल को लकड़ी के बक्शे में छुपा दिया और बक्शे को ताला लगा दिया…..फिर गेट खोला और लाला जल्दी से अंदर आ गया और घर की तलाशी लेने लगा…..उसने पूरा घर और सारे कमरे और वाकी चीजें देखीं मगर कोई नहीं मिला …..और लाला बैठ कर सोच में पड़ गया…

चंपा :- क्या बात है जी आप का मिजाज बदला बदला नज़र आ रहा है….ये सब क्या है….

लाला :- मुझे खबर मिली है की एक चोर घर में घुस आया है…..लेकिन यहाँ तो कोई भी नहीं

चंपा :- आप को किसी ने गलत खबर दी है…..

अचानक लाला की नज़र बक्शे पर पड़ी और उसने चम्पा से बक्शा खोलने के लिए कहा मगर चंपा ने कहा में भूल गयी हूँ की इसकी चाबी कहाँ है बाद में इसकी चाबी ढून्ढ लुंगी …..लाला ने चंपा की तरफ देखा और एक कुल्हाड़ी लेकर बक्शे को मारना शुरू किया….एक दो कुल्हाड़ी बक्शे पर पड़ी तो खुशहाल का पिशाब निकल गया…..और बक्शा मजबूत होने के कारण टूटा नहीं ……

चंपा :- इसे क्यूं तोड़ रहे हो देखा नहीं इसमें रखे सरसों के तेल का डिब्बा फट गया और उसका तेल बह रहा है….

लाला को पीला पिशाब तेल नज़र आया…..और

लाला :- अरे तो पहले क्यों नहीं बताया की इसमें तेल के डिब्बे हें….बेवजाह नुकशान करा दिया…..

चल तुरंत इस तेल को बटोर और मुझे ये बक्शा बुरा लग रहा है… इसे में जरूर तोड़ फोड़ करूँगा ….औरत बोली नहीं इसे तोड़ कर कुछ हासिल नहीं होगा… बेहतर होगा की इसे बेच दीजिये ……

लाला :- इसे कौन खरीदेगा …और में अभी आता हूँ मुहाथ धो कर तू तेल बटोर. ….लाला गया और इधर चंपा छत पर गयी और कुछ ग्वालो को इशारा कर के करीब बुलाया और 500 का नोट फेंकते हुए कहा ….. तुम लोगो को इन पैसो से एक बक्शा खरीदना हे जो मेरे पति बेचेंगे…. और बक्शा और ये पेशे भी तुम्हारे होंगे….ग्वाले खुश हो गए …लाला ने गेट खोला तो ग्वालो को पाया और उन्होंने पानी पीने  की इल्तेज़ा की……

लाला बोला…. पानी तो मिलेगा मगर एक बक्शा है जो बिकाऊ है क्या तुम खरीदना चाहते हो ….

ग्वाले राजी हो गए और बक्शा 500 में बिच गया….लाला ने राहत की सांस ली और दूकान पर चला गया …..उधर ग्वाले बक्शा ले जा रहे थे ….चंपा ने उम्हे इशारे से रोका और चाबी उनकी तरफ फेंक दी और कहा की इसमें एक आदमी हे बक्शे को यहाँ से कुछ दूर ले जा कर आज़ाद कर देना

लाला दूकान पर बैठा हुआ था की अचानक खुशहाल पहुंचा और जो बहुत ही डरा हुआ और उदास था

लाला ने कहा क्या आज काम पर नहीं गए क्या

बो बोला लाल जी गया तो था मगर आज मर कर जिन्दा हुआ हु बल्कि ये समज्हिये की दूसरा जनम हुआ है …

वो कैसे …..आज उसका पति आ गया और उसने इस बार मुझे बक्शे में बंद कर दिया …उसके पति को शक हुआ और उसने बक्शा कुल्हाड़ी से तोडना शुरू किया लाला जी मेरा तो पेशाब निकल गया मगर वही पेशाब काम में आया और उसने उसे तेल बता कर मुझे बचाया ….में तो मारा ही जाता की उसने किसी तराह मेरी जान बचा दी…

लाला ये सब सुन ही रहा था और गुस्से में लाला की आँखे लाल थी की अचानक खुशहाल बोला की उसका बेबकुफ़ पति बड़ा ही खतरनाक है लाला जी…..

अब लाला पर रहा न गया और बोला ……..”अबे कुत्ते के बच्चे वो बेबकूफ में हूँ …कुत्ते मेरे घर में डांका डाल रहा है और मुझे ही सुनाता है”…..अब तो खुशहाल डर के मारे निढाल हो गया और लाला के पेरो में गिर गया

लाला ने कुछ सोचा और बोला ….”उठ कर बैठ और जो अभी तक के कारनामे तुम दोनों ने किये हें वो समाज के सामने बताने होंगे ताकि में इस औरत से निजात पा जाऊ ……इसके बदले में भी तुझे 500 दूंगा”….खुशहाल खुश हो गया और बोला लाला जी जैसा कहोगे बैसा ही करूँगा …..लाला ने खुशहाल को 500 दिए और अगले दिन ससुराल में आने के लिए कहा…..

अगले दिन लाला चंपा को ले कर ससुराल में पहुंचा और लोगो को इकठ्ठा किया और बोला …..”तुम्हारी लड़की कुलक्षणी और बदचलन है अब तक मुझे धोखा देती आई है और गैर मर्दों के साथ इसके सम्बन्ध रहे हें ……इसलिए में इस पंचायत से अपने लिए न्याय चाहता हूँ” ……पंचायत के मुखिया ने कहा :- “तुम्हारे पास कोई सुबूत है”

लाला ने तुरंत खुशहाल को पेश किया और उससे पूरी दास्ताँ सुनाने को कहा |

खुशहाल शुरू हो गया और कहने लगा :- “जनाब में एक दिन काम की तलाश में निकला बस्ती से दूर निकल गया और बहुत जोर की प्यास लगी और मेने पानी तलाश करना शुरू किया की मुझे घर नज़र आया घर की मालकिन बहुत अच्छी थी की उसने पानी पिलाया और मुझे पास भी सुलाया और एक 100 का नोट भी खिलाया. साहब मुझे सौदा बहुत अच्छा लगा. दुसरे दिन गया तो उस का पति आ गया तो उसने मुझे लकड़ियों में छुपा कर बचा लिया. फिर अगले दिन उसका पति बिच में ही आ गया तो उसने मुझे बिस्तर में छुपा कर बचा लिया. फिर अगले दिन तो साहब गजब हो गया की उसका पति आ गया और उसने मुझे बक्शे में छुपा दिया साहब में मारा ही जाता की मेरा पेशाब निकल गया”

…..और इससे पहले की खुशहाल कहानी का खुलासा करता…..की छज्जे पर बैठी हुई चंपा ने एक छोटी कंकरी खुशहाल के मारी तो उसने चंपा को देखा की वो खुशहाल को १००० का नोट दिखा रही थी और देने के लिए इशारा कर रही थी  खुशहाल ने सोचा की 500 लाला और १००० चंपा ये तो अछि रकम है …..

पांचो ने कहा….की और बताओ आगे क्या हुआ ….खुशहाल बोला की आगे क्या होना था जनाब किसी ने आके मेरे कंकरी फेंक के मारी और मेरी आँख खुल गयी…..पांचो ने कहा की क्या जो अब तक सुनाया ये सपना था …..

खुशहाल ने हैरानी भरे लहजे में कहा …..क्या आप हकीकत समझ रहे थे…..पञ्च बोले क्या तुम्हारा चंपा से कोई ताल्लुक है…..खुशहाल बोला जनाब में तो जानता भी नहीं…..ये तो लाला बहुत अच्छे इंसान हें जो उन को मेरा सपना अच्छा लगा और उन्होंने तुम लोगो को सुनाने की लिए 500 रुपये भी दिए…..इतना सुनना था की तमाम भीड़ लाला पर टूट पारी और बहुत पिटाई लगाईं |

The End

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