pulvama

उन शहीदों की शहादत को, मुश्किल है अब भूल पाना ।
उठो साथी कूच करो, पुकार रहा है पुलवामा ।।

कितनी माँ ने लाल खो दिये,कितने सुहाग, सुहागिन ने ।
कितने बच्चे पिता खो गये,कितने भाई, बहिन ने ।।
बिलखती उन आँखो के आँसू,की कीमत है चुकवाना ।
उठो साथी कूच करो,पुकार रहा है पुलवामा ।।

चालीस चिता जलती देखी,सीने मे शोले भडके है ।
कैसे खो गये लाल वहाँ पर,दाग दार क्यो सडके है ।।
उन सडको के दागो को तुम,शत्रु के खून से धुलवाना ।
उठो साथी कूच करो,पुकार रहा है पुलवामा ।।

जिस घाटी मे कलियां खिलती,वहाँ फूल क्यो मुरझा जाते ।
सफेद चादर की वादी मे,क्यों काले झण्डे लहराते ।।
घाटी की गुफाओ मे छिपे,कायर भेडिये है भगवाना ।
उठो साथी कूच करो,पुकार रहा है पुलवामा ।।

कौन पालता है भेडिये,क्यो पनपते गद्दार यहाँ ।
कौन पनाह देता है उनको,किनको उनसे प्यार वहाँ ।।
ऐसे गद्दारो को चुनकर,फाँसी पर है झुलवाना ।
उठो साथी कूच करो,पुकार रहा है पुलवामा ।।

घाटी के गद्दारो सुनलो,हमने अब तो ठाना है ।
है भारत माँ की यही आरजूं,तुमको जड से मिटाना है ।
उठ चुका है आज तुफां अब,तुमको मुहँ की है खाना ।
उठो साथी कूच करो,पुकार रहा है पुलवामा ।।

नही चलेगी राजनीति अब,नही होगा कोई नेता ।
हर इंसान इस देश का,सिर्फ भारत माँ का है बेटा ।।
पक्ष-विगक्ष साथ खडे,अब नही चलेगा कोई बहाना ।
उठो साथी कूच करो,पुकार रहा है पुलवामा ।।

सत्य अहिंसा की आड मे,खूब जला दी घाटी है ।
हर दिन गोली झेल-झेलकर,छलनी हो गई छाती है ।।
भारत माँ की लाज बचाने,सबको मिलकर है जाना ।
उठो साथी कूच करो,पुकार रहा है पुलवामा ।।

नही चाहिये वो पडौसी,जो नफरत दिल मे पाले है ।
मिटा दो उनके निशान,जो आतंक के रखवाले है ।
वतन विरोधी उन ताकतो को,जड से है मिटवाना ।।
उठो साथी कूच करो,पुकार रहा है पुलवामा ।।

धन्य हो गई वो जवानी,जो देश हित बलिदान हुई ।
नमन करे हम उस जिन्दगी को,जो मातृभूमि पर कुर्बान हुई ।।
नारायण, आज कलम उठी है,इतिहास नया है लिखवाना ।
उठो साथी कूच करो,पुकार रहा है पुलवामा ।।

उन शहीदों की शहादत को,मुश्किल है अब भूल पाना ।
उठो साथी कूच करो,पुकार रहा है पुलवामा ।।

Rights Available Click Here



Post your script for sell




Leave a Reply