हरयाणवी लोकगीत

गर्मी का महीना

गर्मी का महीना बिन बिजली पिया काट्या ना जावै मेरा तर तर गिरै पसीना इब यो डाट्या ना जावै तू इतना माल कमावै एक मेरा कैहण पुगा दे नै पिया ल्यादे तू जरनेटर अर एसी लग्वादे नै 2 M:- यें क्युकर बणै रपिये तन्नै बेरा ना गोरी तेरे सारे केहण पुगाऊँ सिर पै बैठण नै …

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