Up lakhimpur kheri

ऐ अजनबी..

राहों में आ ऐसे… जैसे कहीं ना मिले बाहों में आ ऐसे… जैसे कहीं दिल मिले ऐ अजनबी…ऐ अजनबी… तुम्हें पाके भी.. ऐसा एहसास न हुआ तुम्हें देखूं तो … ऐसा खयाल ना हुआ है जैसे कोई सपना अपना हुआ ए अजनबी… ए अजनबी…. ढूंढूं तुम्हें… यूं कहीं साथी है अब ये जमीन ये दर्मिंयां.. …

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